प्यार - खुद में रौशनी
प्यार- खुद में पूर्ण
न इसके पाँव में कांटे चुभते हैं
न दर्द होता है
न भय होता है
न कोई फासले होते हैं ....
नाग की तरह लहराता साया
इसे निगल नहीं पाता
प्यार न किसी की शाबाशी का कायल होता है
न किसी के रहम का इंतज़ार करता है
प्यार - प्यार ही होता है
गौर से देखो
तुम जिसे खुदा या ईश्वर कहते हो
वह प्यार ही होता है ...






